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सोमवार, 18 जनवरी 2010

ठण्ड

बर्फवारी के दिनों मैं भी
कहाँ रह गयी है अब
पहले जैसी ठण्ड ,




अभ्यस्त हो गए हैं लोग
बारहमासी
ठन्डे रिश्ते नातों की
ठण्ड में,
बिल्ली की तरह
चूल्हे की
बुझी राख में
अकेले दुबक कर भी,




सिमटे हुए हैं लोग
अकड़ गए हैं उनके जज्बात
घुड़क रहे हैं जिस-तिस से
पागल हुए कुत्तों की तरह,




किस भाग्यवान को मिल रहा है अब-
मां का लाड़
कौन सह रहा
पिता की डांट
कौन मान रहा
सयानों की सलाह,




क्या भाई-क्या बहन
क्या बेटा-क्या बेटी
क्या पति-क्या पत्नी
क्या बड़ा-क्या छोटा भाई
जहाँ देखो वहीं दिखावा
वहीँ ठण्ड
बस
बारहमासी ठण्ड.


















......नवीन जोशी 
(मेरी कुमाउनी कविता 'अरड' का भावानुवाद)

8 टिप्‍पणियां:

  1. अब अर्थ पर ही जोर रह गया गालिब !!

    क्या नब्ज पकडी़ है

    कुमाँउनी कविता भी सांथ मे दो भाई

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  2. ulook ji खास आपके लिए अपनी कुमाउनी कविताओं की पांडुलिपियाँ जोड़ दी हैं. अब यह तो बता दीजिये, यह 'ulook'क्या है. आपकी प्रोफाइल का 'बर्बादे गुलिस्तां...'में उल्लिखित तो नहीं ?

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  3. नवीन जी
    अब एगो रंग ब्लोग में
    जो बात अरड़ मे छू
    ठण्ड मे नी भे हो
    तसिके दगड़े दगड़े हिंदी कुमाँउनी
    दीने रया कविता ।

    और होयी
    अब यो उल्लूक बात
    किले जाण चानेर भया तुम
    जब जाग जाग भेठी उल्लू
    देखण लाग रोछा आज।

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  4. बहुते भाल जोश ज्यू. अब का रेगो उस अरड और का रेगायीं वो लोग. अपन भाषक कविता लिजी तुमकू बधाई.

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  5. joshi ji namaskaar! blog ka title bahut kuch kah gayaapne aap main....if u know please tell me , who is the writter of our traditional song " Beru paako baron masam , o narain kafal pako chaita.......

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  6. Bhakuni ji, I think this is a folk song, which got popular when Late Mohan Upreti composed it and got Name 'Bedu pako boy' from Pt. Nehru. It was sung by Singing Legend of Kumaon Late Gopal Babu Goshwami, You can get more about this at : "http://74.125.153.132/search?q=cache:UaWSefSg9QoJ:www.freeindiamedia.com/article.php%3FcatID%3D27+Bedu+Pako+bars+Masa's+writer&cd=2&hl=en&ct=clnk&gl=in"

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  7. Gaon ki yaad taaja kar dee aapne. Apni boli mein ek apna alag hi apnapan hota hai, hain na......
    likhte rahiyega

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